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शनिवार, 8 नवंबर 2014

कार्टून-कैरीकेचर

आलोक निरन्तर के कार्टून-कैरीकेचर
इण्डियन इन्स्टीट्यूट ऑफ़ कार्टूनिस्ट्स द्वारा गैलरी में १७-२९ नवम्बर, २०१४ (रविवार अवकाश) को आलोक निरन्तर के कार्टून-कैरीकेचर प्रदर्शनी का आयोजन किया जा रहा है।
जानेमाने इतिहासज्ञ श्री राम चन्द्र गुहा १७ नवम्बर को प्रात: ११ बजे इस कार्टून-कैरीकेचर प्रदर्शनी का उद्घाटन करेंगे।
आप सभी आमन्त्रित हैं।
स्थान: भारतीय कार्टून गैलरी, नंबर १, मिडफ़ोर्ड हाउस, 
मिडफ़ोर्ड गार्डन, एमजी रोड, निकट बिग किड्स’ केम्प 
बिल्डिंग के पास, ट्रिनिटी सर्किल, बंगलूर -५६०००१  
• फोन: ०८०-४१७५८५४०, ०९९८००९१४२८ (080-41758540, 09980091428) 
• ईमेल: info@cartoonistsindia.com   cartoonistsindia@gmail.com
• वेबसाइट: www.cartoonistsindia.com  

मंगलवार, 4 नवंबर 2014

कार्टून प्रदर्शनी

कार्टूनिस्ट सुधीर तैलंग का एक पुराना फ़ोटो (हिन्दुस्तान टाइम्स) 

फ़ोटो: कार्टूनिस्ट चन्दर

सोमवार, 6 अक्तूबर 2014

कार्टून वॉच


Cartoon Watch Cartoon Festival 2014 in Haribhoomi, Navabharat Press, Dainik Bhaskar and The Hitavada- 06/10/2014

गुरुवार, 25 सितंबर 2014

कार्यशाला

दो दिवसीय फाउण्डेशन कार्टून कार्यशालाएं
cw01.JPGइण्डियन इन्स्टीट्यूट ऑफ़ कार्टूनिस्ट्स २६ व २८ सितंबर तथा २५ व २६ अक्टूबर, २०१४ (शनिवार और रविवार) २ दिवसीय फाउंडेशन कार्टून कार्यशालाएं आयोजित कर रहा है। इच्छुक प्रतिभागी  अपना नाम, डाक पता, उम्र, शिक्षा, व्यवसाय  विवरण भेज सकते हैं। आयु की कोई सीमा नहीं है।
स्थान: भारतीय कार्टून गैलरी, नंबर १, मिडफ़ोर्ड हाउस, 
मिडफ़ोर्ड गार्डन, एमजी रोड, निकट बिग किड्स’ केम्प 
बिल्डिंग के पास, ट्रिनिटी सर्किल, बंगलूर -५६०००१  
• फोन: ०८०-४१७५८५४०, ०९९८००९१४२८ (080-41758540, 09980091428) 
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बुधवार, 10 सितंबर 2014

वन्यजीवन कैरीकेचर

 रोहन चक्रवर्ती का एक आकर्षक चित्रण
वन्यजीवन के चित्र
इण्डियन इन्स्टीट्यूट ऑफ़ कार्टूनिस्ट्स द्वारा १०१वीं कार्टून प्रदर्शनी ‘वाइल्डलाइफ़ द टूनी वे’ आयोजित की जा रही है। १३ से २७ सितम्बर २०१४ तक आयोजित होने वाली यह कार्टून प्रदर्शनी वन्य जीवन संरक्षण को समर्पित है।  
बंगलूर स्थित इण्डियन इन्स्टीट्यूट ऑफ़ कार्टूनिस्ट्स (आईआईसी) की गैलरी में पहली बार रोहन चक्रवर्ती के वन्यजीवन से जुड़े कैरीकेचर प्रदर्शित किये जाएंगे। 
आप सभी कार्टूनिस्ट और कार्टूनप्रेमी सादर आमन्त्रित हैं।
प्रदर्शनी  
• दिनांक १३ से २७ सितम्बर २०१४ तक  
•  समय: प्रात: १०.०० से सायं ०६.०० बजे तक
• स्थान: इण्डियन इन्स्टीट्यूट ऑफ़ कार्टूनिस्ट्स,
# 1, मिडफ़ोर्ड हाउस, मिडफ़ोर्ड गार्डन, 
एमजी रोड, बंगलूर-560001 (भारत)
• सम्पर्क: वीजी नरेन्द्र, प्रबन्धन ट्रस्टी,
फोन: ०८०-४१७५८५४० (080-41758540), मोबाइल: ०९९८००९१४२८ (09980091428)
• वेब स्थल: www.cartoonistsindia.com 
• ई-मेल: info@cartoonistsindia.com 
            cartoonistsindia@gmail.com 
• फ़ेसबुक:  http://www.facebook.com/pages/Indian-Institute-of-cartoonists/249178643402




बुधवार, 6 अगस्त 2014

कार्टूनिस्ट प्राण

चाचा चौधरी के जन्मदाता
कार्टूनिस्ट प्राण नहीं रहे 












५ अगस्त/कल/मंगलवार की रात कार्टूनिस्ट प्राण का निधन हो गया। प्राण ने सन १९६० से कार्टून बनाने की शुरुआत की थी। उन्होंने आरम्भ में दिल्ली से प्रकाशित होने वाले अख़बार मिलाप में कार्टून बनाए।
हिंदी बाल पत्रिका लोटपोट के लिए उन्होंने ’चाचा चौधरी’ को जन्म दिया। यह पात्र बाद में काफ़ी लोकप्रिय हो गया। जल्दी ही यह एक स्वतंत्र कॉमिक्स के तौर पर बहुत प्रसिद्ध हो गया। चाचा चौधरी को लेकर एक टीवी सीरियल भी बनाया गया था जिसे बच्चों और बड़ों ने खूब पसन्द किया। प्राण के बनाए अनेक कार्टून पात्र जैसे चाचा चौधरी, साबू, रमन, श्रीमतीजी, बिल्लू आदि घर-घर में सभी की पसन्द बन गये।
प्राण भारतीय कॉमिक जगत के पर्याय ही बन गये। कार्टूनिस्ट प्राण को भारत का वाल्ट डिजनी भी कहा जाता है। वे सबसे सफल कार्टूनिस्टों में से एक गिने जाने लगे। वे डायमंड कॉमिक्स से लम्बे समय से जुड़े हुए थे। उन्हें लोकप्रियता और धन दोनों ही भरपूर मिले।
उनका जन्म १५ अगस्त, १९३८ को लाहौर में हुआ था. उनका पूरा नाम प्राण कुमार शर्मा था, लेकिन वो प्राण के नाम से ही जाने जाते थे।
नमन...श्रद्धांजलि! 
देखें-
http://www.cartoonnewshindi.blogspot.in/2013/08/blog-post_14.html   http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2014/08/140806_pran_cartoonist_no_more_pk.shtml

मंगलवार, 29 जुलाई 2014

सोमवार, 9 जून 2014

कार्टूनार्ट फ़ाउण्डेशन

कार्टूनार्ट फ़ाउण्डेशन का शुभारम्भ
राजधानी के प्रेस क्लब में ०८ मई, २०१४ को सायं कार्टूनिस्ट-कार्टून प्रेमियों कार्टून कला के प्रचार, प्रसार, प्रशिक्षण आदि के लिए योजना बनाकर कुछ करने को लेकर विचार-विमर्श किया। तय हुआ कि ’कार्टून आर्ट फ़ाउण्डेशन’ का शुभारम्भ किया जाए। नाम का प्रस्ताव शरद कुमार ने प्रस्तुत किया।
उपस्थित लोगों में अधिकांश १९८२-८३ बैच के ललित कला महाविद्यालय (नयी दिल्ली) के पूर्व छात्र थे। भारतीय मूल के अमरीकी नागरिक अरुण मोदी ने कहा कि कार्टून कला को एक विषय की भांति पढ़ाया जा सके, ऐसा प्रबन्ध हो। महारानी बाग पॉलिटेक्निक में व्याख्याता मधु शंकर ने कहा कि कार्टून कला पर विशेष रूप से अब बहुत ध्यान देने की जरूरत है।
कार्टूनिस्ट चन्दर ने कहा कि कार्टूनार्ट फ़ाउण्डेशन की शुरूआत कार्टून कला के प्रचार, प्रसार, प्रशिक्षण आदि के लिए एक अच्छा माध्यम बने, ऐसा मेरा प्रयास रहेगा। इस कार्य को जारी रखने के लिए सभी के सहयोग की आवश्यता बनी रहेगी।
इस अवसर पर अनिल मनन, सुधीर नगीना, दीपाली बोस, अनिल परगनिहा, शुभ्रा वर्मा, रजनी मनन, राजीव काकड़िया, किरण खुल्लर, गुरलीन आनन्द सहित अन्य लोग भी उपस्थित थे।
प्रस्तुति: विशाल कुमार

शनिवार, 7 जून 2014

कार्टून प्रदर्शनी



सौ वीं कार्टून प्रदर्शनी
इण्डियन कार्टून गैलरी में कार्टून प्रदर्शनी का विशेष आयोजन

शनिवार, 26 अप्रैल 2014

मोदी की कहानी

चित्रकथा मोदी की कहानी
कार्टून वाच पत्रिका का प्रकाशन कर रहे त्र्यम्बक शर्मा ने हाल ही में वाराणसी में वहाँ के महापौर राम गोपाल मोहले से 'मोदी की कहानी’  ( चित्रकार हुसैन ज़ामिन) शीर्षक चित्रकथा का विमोचन कराया।

शुक्रवार, 25 अप्रैल 2014

विदेशी कार्टून

बंगलोर में विदेशी कार्टूनों की प्रदर्शनी
बंगलोर स्थित कार्टून गैलरी में ३ मई, २०१४ को विदेशी कार्टूनों की प्रदर्शनी का  आर एच कुलकर्णी (प्राचार्य,     कॉलेज ऑफ़ फ़ाइन आर्ट्स्, कर्नाटक चित्रकला परिषद) के करकमलों सेआरम्भ होगा। श्री अमरनाथ कामथ विशिष्ट अतिथि होंगे।
यह कार्टून प्रदर्शनी १७ मई, २०१४ तक चलेगी।

सम्पर्क: वीजी नरेन्द्र, प्रबन्ध न्यासी,
इण्डियन कार्टून गैलरी,
इण्डियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ कार्टूनिस्ट्स, 1, मिडफ़ोर्ड हाउस के, मिडफ़ोर्ड गार्डन्स, एम.जी. रोड के बाहर, बंगलोर -560001 
फ़ोन: ०८०+४१७५८५४०,: ९९८००९१४२८
WebSite: www.cartoonistsindia.com 
E-mail: info@cartoonistsindia.com  cartoonistsindia@gmail.com

गुरुवार, 6 फ़रवरी 2014

सोमवार, 3 फ़रवरी 2014

कार्टूनिस्ट असीम

कार्टूनिस्ट असीम त्रिवेदी जायसवाल के सामने 
• प्रवीन मोहता, कानपुर
आम आदमी पार्टी केंद्रीय कोयला मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल को चुनौती देने के लिए कार्टूनिस्ट असीम त्रिवेदी को कानपुर लोकसभा सीट से टिकट दे सकती है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, इस पर जोर-शोर से विचार मंथन चल रहा है। वहीं इस मामले में असीम त्रिवेदी का कहना है कि उनकी पार्टी से बातचीत चल रही है। अगर पार्टी मुझे कानपुर से लड़ने को कहेगी तो मैं इसके लिए तैयार हूं। वैसे भी मेरा कानपुर से पुराना जुड़ाव रहा है।
Aseem-Trivediकानपुर नगर लोकसभा सीट से पिछले 3 बार से केंद्रीय कोयला मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल झंडा गाड़ते रहे हैं, लेकिन इस बार इस सीट पर मुकाबला दिलचस्प होने की उम्मीद है। एसपी जहां कॉमेडियन राजू श्रीवास्तव को पहले ही उम्मीदवार घोषित कर चुकी है, वहीं बीएसपी से सलीम अहमद के प्रत्याशी होने की पूरी संभावनाएं हैं। बीजेपी से कोई नाम तय नहीं है, लेकिन सीनियर नेता कलराज मिश्र का नाम जोर-शोर से चल रहा है। इन तमाम समीकरणों को आम आदमी पार्टी बिगाड़ सकती है। अरविंद केजरीवाल ऐलान कर चुके हैं कि कांग्रेस और बीजेपी के कई बड़े नेता उनके निशाने पर हैं। इनमें श्रीप्रकाश जायसवाल भी हैं। माना जा रहा है कि इसी रणनीति के तहत पार्टी फेमस कार्टूनिस्ट असीम त्रिवेदी को कानपुर से चुनाव मैदान में उतार सकती है। हालांकि इस बारे में कोई फैसला नहीं हुआ है। पार्टी के शहर संयोजक योगेश श्रीवास्तव के अनुसार 10 फरवरी के बाद उनके उम्मीदवारों की लिस्ट आने लगेगी। जानकारों का यह भी कहना है कि अब तक कौशांबी (गाजियाबाद) ऑफिस में कानपुर के लिए 50 से ज्यादा आवेदक टिकट की एप्लिकेशन भेज चुके हैं। शुक्लागंज इलाके के रहने वाले असीम ने बताया कि कानपुर से चुनाव लड़ने के लिए वह पार्टी से बातचीत कर रहे हैं। अगर पार्टी ने आदेश दिया तो वह जरूर लड़ेंगे।पार्टी की कानपुर यूनिट के मीडिया इंचार्ज अमित अवस्थी के अनुसार, पार्टी 31 जनवरी तक 1 लाख 10 हजार लोगों को मेंबर बना चुकी है। शहर में पार्टी से जुड़ने के लिए जबर्दस्त उत्साह देखा जा रहा है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि अब तक हुई मेंबरशिप में करीब 30 फीसदी मुस्लिम हैं। यह फैक्टर कई पार्टियों का हिसाब-किताब बिगाड़ सकता है। 
सौजन्य • नवभारत टाइम्स Feb 1, 2014

मंगलवार, 28 जनवरी 2014

बहादुर

आबिद सुरती के “बहादुर” पर एक मीडिया हाउस का कब्ज़ा 
• पंकज शुक्ल
बातचीत के दौरान शाहरुख खान के दिल से छलक आई वो ख्वाहिश जो वो हिंदी सिनेमा के बादशाह होकर भी पूरी नहीं कर पा रहे हैं। दरअसल, शाहरुख बड़े परदे पर 'बहादुर' बनना चाहते हैं। जिनकी उम्र पैंतालिस पचास के आसपास होगी, उनको अपने बचपन के इंद्रजाल कॉमिक्स ज़रूर याद होंगे। एक रुपये की एक किताब मिलती थी और वो एक रुपया भी जुगाड़ना जतन का काम होता था। किराए पर तब 10 पैसे में मिला करते थे कॉमिक्सबहादुर। इंद्रजाल कॉमिक्स याद होंगेw तो फिर उनका एक किरदार ‘बहादुर’ भी याद होगा। ‘बहादुर’ यानी इसी नाम से बनी कॉमिक सीरीज का हीरो। बाप जिसका डाकू था, लेकिन उसने कानून के पाले में आने का फैसला किया। केसरिया कुर्ता, डेनिम की जींस। कॉमिक्स की दुनिया का पहला हिंदुस्तानी हीरो। दुनिया भर में वो आबिद सुरती के बहादुर के नाम से मशहूर हुआ। शाहरुख खान इस किरदार का चोला पहनकर बड़े परदे पर आना चाहते हैं। बोले, “बचपन में इसके बारे में खूब पढ़ा। पूरा कलेक्शन जमा करके रखा। अब मन किया कि इस पर फिल्म बनाई जाए तो इसके कॉपराइट नहीं मिल रहे।” शाहरुख खान जैसी हस्ती किसी किरदार पर फिल्म बनाना चाहे और उसके सामने ऐसी अड़चनें आ जाए कि वो भी न पार सकें तो मन में उत्सुकता तो जागती ही है। यहां से शाहरुख ने शुरू की कहानी मुंबई के वॉटरमैन की। ये वॉटरमैन और कोई नहीं, हमारे आपके अजीज़ आबिद सुरती साब ही हैं। जी हां, वही जिनके कॉमिक किरदार ढब्बू जी ने कभी धर्मवीर भारती तक पर उर्दू को बढ़ावा देने का इल्जाम लगा दिया था, और वो इसलिए कि ढब्बूजी धर्मयुग के पीछे के पन्ने पर छपते थे और लोग धर्मयुग खरीदने के बाद उसे पीछे से ही पढ़ना शुरू करते थे। आबिद सुरती के किरदार दुनिया भर में मशहूर हैं। उनकी लिखी कहानियां परदेस में हिंदी सीखने के इच्छुक लोगों को क्लासरूम में पढ़ाई जाती हैं। नाटककार भी वो रहे। फिल्मों में स्पॉट बॉय से लेकर लेखन तक में हाथ आजमाया। पेंटर ऐसे कि अगर एक ही लीक पकड़े रहते तो आज एम एफ हुसैन से आगे के नहीं तो कम से कम बराबर के कलाकार होते। आबिद सुरती मुंबई से थोड़ा दूर बसे इलाके मीरा रोड में अकेले रहते हैं। दोनों बेटे सैटल हो चुके हैं। एक का तो शाहरुख ने नाम भी लिया, किसी कंपनी में नौकरी लगवाने के सिलसिले में। आबिद की पत्नी अपने बच्चों के साथ हैं, और वो मीरा रोड में ही ड्रॉप डेड एनजीओ के नाम पर नलों से पानी टपकने के खिलाफ मुहिम चलाते हैं। पढ़ने में अजीब सा लग सकता है लेकिन कोई छह साल पहले अपने एक दोस्त के घर में लेटे आबिद सुरती को घर के बूंद बूंद टपकते नल ने सोने नहीं दिया। Brave-act1और, बस वहीं से ये ख्याल जनमा। हर इतवार आबिद अपना झोला लेकर घर से निकलने लगे। झोले में होती कुछ रिंचे, प्लास और वाशर। वो सोसाइटी के घर घर जाकर टपकते नल ठीक करने लगे। और, यहीं से शुरू हुई ड्रॉप डेड फाउंडेशन की। शाहरुख खान ने आबिद सुरती की इस मुहिम के बारे में किसी अखबार में पढ़ा और उन्हें एक लंबा एसएमएस भेज दिया। शाहरुख ने ये भी लिखा कि कैसे वो बचपन से 'बहादुर' के फैन रहे हैं। फैन मैं भी बचपन से 'ढब्बू जी' का रहा हूं। शाहरुख ने बस इस किरदार को बनाने वाले आबिद सुरती से मुलाकात की मेरी इच्छा को फिर से जगा दिया। आबिद सुरती की फ्रेंड लिस्ट में मैं शामिल रहा हूं और उनकी सालगिरह पर मुबारक़बाद भी भेजता रहा हूं। इस बार बात आगे बढ़ी। मैंने संदेश भेजा। उनका जवाब आया। पिछले इतवार हम मिले फन रिपब्लिक के पास एक रेस्तरां में। बातों बातों में ज़िक्र फिर से 'बहादुर' का निकला। 'बहादुर' के परिवेश के बारे में बताते वक्त 78 साल के आबिद सुरती के चेहरे की चमक देखने लायक थी। फिर जैसे ज़ोर का झोंका आए और लौ फड़फड़ाने लगे, वैसी ही बेचैनी के साथ बताने लगे, “शाहरुख से पहले कबीर सदानंद ने भी बहादुर पर फिल्म बनाने की प्लानिंग की थी। हमने इस किरदार को ट्रेडमार्क रजिस्टर्ड कराना चाहा। पर पता चला कि एक बहुत बड़े मीडिया हाउस ने 'बहादुर बाई आबिद सुरती' नाम का ट्रेडमार्क अपने नाम रजिस्टर्ड करा लिया है।” सुनकर बड़ा दुख हुआ। दूसरों के अधिकारों की दिन रात बात करने वाले मीडिया हाउस क्या ऐसे भी किसी कलाकार का हक मार देते हैं। कॉपीराइट कानून कहता है कि किसी कृति के बनाते ही उसका कॉपीराइट सृजक के नाम हो जाता है। उसका कहीं रजिस्ट्रेशन जरूरी नहीं। माने कि अगर कोई ढंग का वकील आबिद सुरती का मामला अपने हाथ में ले तो उनके बौद्धिक संपदा अधिकार उन्हें मिल सकते हैं। मुझे खुद एक हफ्ता लग गया इस बात को दुनिया के सामने लाने में। चाहता हूं उनकी लड़ाई लड़ूं। जितना बन सकेगा कोशिश करूंगा। क्या आप साथ देंगे? • साभार, लिन्क: http://mediadarbar.com/25705/trademark-registered-abid-surti-character-bahadur-by-a-media-house-without-any-authraizetion/

सोमवार, 13 जनवरी 2014

कार्टूनेचर फ़ीचर सेवा

कार्टून न्यूज़ हिन्दी झरोखा